Shivpal Yadav: कभी मुलायम के बाद थे एसपी का दूसरा सबसे कद्दावर चेहरा, आज 111 माननीयों में शामिल 'अकेले' विधायक

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। दरअसल शिवपाल सिंह यादव समाजवादी पार्टी से विधायक हैं। कई दिनों से उनके बीजेपी के करीब जाने की खबरें चल रही हैं। इसी को लेकर अखिलेश यादव का एक बयान आया, शिवपाल के पलटवार ने सियासत गरमा दी है। बात अगर शिवपाल के राजनीतिक जीवन की करें तो कभी सपा के सबसे बड़े नाम में शुमार शिवपाल का राजनीतक ग्राफ पिछले 5 साल काफी उथल-पुथल भरा रहा है।

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यूपी चुनाव के दौरान शिवपाल की मुलायम और अखिलेश के साथ ये तस्वीर खूब वायरल हुई थी। (File Photo)

हाइलाइट्स

  • 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले शिवपाल और अखिलेश की लड़ाई सामने आई
  • एसपी पर कब्जे की जंग हारकर शिवपाल ने बनाई अपनी पार्टी
  • प्रसपा को कुछ खास पहचान नहीं दिला सके
  • 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले अखिलेश से जुड़े पर राहें रहीं जुदा
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत में शिवपाल सिंह यादव (Shivpal Singh Yadav) का अपना अलग कद रहा है। समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के निष्ठावान छोटे भाई के रूप में शिवपाल सिंह यादव ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और समाजवादी पार्टी की ‘रीढ़’ बन गए। कभी मुलायम के बाद समाजवादी पार्टी में दूसरा सबसे बड़ा चेहरा शिवपाल सिंह यादव ही माने जाते थे। लेकिन अब स्थितियां बदल चुकी हैं। पांच साल में लखनऊ की गोमती नदी में काफी पानी बह चुका है। अब अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) समाजवादी पार्टी के सर्वेसर्वा हो गए हैं और शिवपाल की हैसियत पार्टी के 111 विधायकों में शामिल सिर्फ एक विधायक की रह गई है। अब उनके बीजेपी में जाने की अटकलें सत्ता के गलियारे में तैर रही हैं। बहरहाल, बड़ा सवाल ये है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि सपा के इस कद्दावर नेता का महज पांच साल में ये हाल हो गया?

इसे समझने के लिए हम आपको 2012 में ले चलते हैं, उस समय मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी ने बसपा को सीधी मात दी थी और विधानसभा में बहुमत की सरकार बनी थी। मुलायम की सरकारों में शिवपाल मुख्यमंत्री के बाद हमेशा से दूसरे सबसे कद्दावर मंत्री रहे। लेकिन इस बार पार्टी की जीत के बाद सियासत बदल गई। मुलायम सिंह यादव पार्टी से दूर हो गए और अखिलेश यादव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बना दिए गए। शिवपाल के लिए ये झटका माना गया। कई खबरें आईं कि शिवपाल का खेमा अखिलेश की ताजपोशी से खुश नहीं था, मुलायम के जाने के बाद उम्मीद थी कि शिवपाल को कमान मिलेगी लेकिन वह नंबर 2 ही बने रहे।
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इसके बाद समय बीतता गया और धीरे-धीरे अखिलेश और शिवपाल के बीच तनातनी बढ़ती चली गई। पांच साल पूरे होने को आए तो 2016 की सर्दियों में परिवार के बीच घमासान सबके सामने आ गया। स्थिति ये हो गई कि पार्टी अखिलेश खेमा और शिवपाल खेमा में बंट गया। बीच में मुलायम चुपचाप खड़े दिखाई दिए। उन्होंने अपने भाई की बाताें को खारिज तो नहीं किया लेकिन खड़े वह अखिलेश यादव के साथ ही नजर आए। जनवरी 2017 में आखिरकार अखिलेश यादव समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए और मुलायम सिंह यादव सरंक्षक की भूमिका में आ गए। शिवपाल ने काफी कोशिश की लेकिन संगठन पर वह कब्जा बरकरार नहीं रख सके।

इसके बाद हुए चुनावों में समाजवादी पार्टी की बुरी तरह हार हुई और बीजेपी पहली बार प्रचंड जीत के साथ सत्ता में आ गई। हार के बाद परिवार की लड़ाई थोड़ी दब जरूर गई लेकिन खत्म नहीं हुई। आखिरकार 2018 में शिवपाल ने अपनी अलग प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (लोहिया) पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया। साफ हो गया कि शिवपाल और अखिलेश की राहें जुदा हो चुकी हैं।
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लेकिन कहानी अभी बाकी है। समाजवादी पार्टी से अलग में शिवपाल को सपा के कई पुराने नेताओं का साथ मिला। पूरे प्रदेश की नजरें अब शिवपाल पर थीं, सवाल उठ रहे थे कि क्या समाजवादी पार्टी की तरह शिवपाल प्रसपा को उस ऊंचाई पर ले जा पाएंगे। मगर समय बीतने के साथ ही इसका जवाब भी सामने आता गया। तमाम प्रयासों के बाद भी शिवपाल सिंह यादव प्रसपा की अलग पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके। इसके बाद प्रसपा के किसी बड़ी पार्टी से गठबंधन को लेकर तमाम खबरें आने लगीं। शिवपाल की मुलाकात तो तमाम नेताओं से होती रही लेकिन प्रसपा के लिए कोई फायदेमंद गठबंधन नहीं मिल सका। समय बीतता गया। पांच साल बाद 2022 का चुनाव आया तो चर्चाएं फिर तेज हुईं।
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सत्ता में वापसी के लिए अखिलेश यादव थोड़ा और नरम नजर आए। उन्होंने नई रणनीति के तहत तमाम छोटे दलों को जोड़कर बड़ा गठबंधन बनाया। अखिलेश की इस कवायद के साथ ही प्रसपा भी चर्चा में आ गई। आखिरकार वो दिन आ गया। चुनाव आते-आते शिवपाल और अखिलेश में सुलह हो गई और प्रसपा का सपा से गठबंधन हो गया। सभी ने सोचा चलो अब सब ठीक हो गया। शिवपाल के अनुभव का लाभ चुनावों में अखिलेश को मिलेगा। लेकिन ऐसा दिखा नहीं। अखिलेश यादव ने प्रसपा के साथ गठबंधन तो किया लेकिन टिकट बंटवारे में प्रसपा को एक भी सीट नहीं दी। बस पार्टी प्रमुख शिवपाल यादव को उनकी परंपरागत जसवंतनगर सीट दी, वाे भी समाजवादी पार्टी के टिकट पर।

शिवपाल सिंह यादव वहीं खड़े दिखाई दिए, जहां से पांच साल पहले वो चले थे। बहरहाल, यूपी चुनाव में सपा को उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिली और अखिलेश सिर्फ विपक्ष के ही सबसे बड़े नेता बन सके। यूपी चुनाव का परिणाम आने के कुछ ही दिनों बाद अब फिर से शिवपाल चर्चा में आ गए हैं। खबरें आ रही हैं कि शिवपाल सिंह यादव बीजेपी के संपर्क में हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर कोई इसे स्वीकार नहीं कर रहा है लेकिन शिवपाल के कुछ ट्वीट और बयानों से इन खबरों को अफवाह जरूर मिली।
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यूपी चुनाव 2022 में साथ आए शिवपाल और अखिलेश यादव


शिवपाल के भाजपा के संपर्क में होने के सवाल पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने आगरा में साफ कर दिया है कि जो भी भाजपा के संपर्क में है, वो सपा में नहीं रह सकता। अखिलेश के बयान के बाद अब शिवपाल सिंह यादव फिर से आक्रामक नजर आने लगे हैं। उन्होंने गुरुवार को लखनऊ में कहा कि अगर अखिलेश यादव को लगता है कि वह बीजेपी के संपर्क में हैं तो विधानमंडल दल से निकाल क्यों नहीं देते? मैं सपा के 111 विधायकों में से एक हूं। अखिलेश यादव को बीजेपी में संपर्क को लेकर उन्हें मुझे निकालने का अधिकार है। वहीं भाजपा में शामिल होने के सवाल पर शिवपाल ने कहा कि उचित समय आने पर आपको अपना निर्णय बता दूंगा। कहां जा रहा हूं? क्या कर रहा हूं कुछ नहीं छुपाऊंगा।

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यूपी चुनाव के दौरान शिवपाल की मुलायम और अखिलेश के साथ ये तस्वीर खूब वायरल हुई थी। (File Photo)

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