मलेरिया, कालाजार, डेंगू जैसी घातक बीमारी फैलाने वाले मच्छर (Mosquito) से बचने का सबसे कारगर उपाय मच्छरदानी (Mosquito Net) है। लेकिन इसे शत प्रतिशत लोग नहीं अपनाते। भी केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की एक रिपोर्ट (NFHS-5) आई है, उससे पता चलता है पूर्वोत्तर (Northeast) के लोग मच्छरदानी लगाने में सबसे आगे हैं। उसके बाद पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार आदि राज्य आते हैं।

त्रिपुरा है सबसे आगे
एनएफएचएस-5 के मुताबिक देश भर में मच्छरदानी के उपयोग में पूर्वोत्तर का त्रिपुरा राज्य सबसे आगे है। वहां के 97.9 फीसदी परिवार के पास कम से कम एक मच्छरदानी तो है ही। इस सूची में पूर्वोत्तर के ही असम का स्थान दूसरा है। वहां के 97.7 फीसदी गृहस्थों के पास मच्छरदानी है। मणिपुर देश का तीसरा राज्य है, जहां अन्य राज्यों से ज्यादा मच्छरदानी है। वहां के 97.1 फीसदी परिवार के पास मच्छरदानी है। मिजोरम में भी 93.7 फीसदी घरों में मच्छरदानी उपलब्ध है।
पूर्वी राज्यों में भी खूब है मच्छरदानी
हिमालयी राज्यों को छोड़ दें तो मैदानी राज्यों में पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार और झारखंड में सबसे ज्यादा घरों में मच्छरदानी है। पश्चिम बंगाल में देखें तो वहां के 87.8 फीसदी गृहस्थों के घरों में मच्छरदानी है। इसके बाद ओडिशा का स्थान आता है। वहां के 81.3 फीसदी घरों में मच्छरदानी है। बिहार में भी 78.2 फीसदी घरों गृहस्थों के पास मच्छरदानी है जबकि झारखंड के 74.6 फीसदी परिवार के पास कम से कम एक मच्छरदानी है।
पूरे देश में 36 फीसदी परिवार के पास ही है
मच्छरदानी के उपयोग में अखिल भारतीय आंकड़ों पर गौर करें तो देश भर में 36.2 फीसदी लोगों के पास मच्छरदानी है। मच्छरदानी रखने में ग्रामीण आबादी शहरों से आगे है। गांवों के हिसाब से देखें तो 42.4 फीसदी परिवार के पास मच्छरदानी है जबकि शहरों में यह 23.9 फीसदी परिवार के पास है।
उत्तर भारत के राज्य सबसे पीछे
मच्छरदानी के उपयोग में उत्तरी राज्य सबसे पीछे हैं। लद्दाख में महज 1.2 फीसदी परिवार इसका उपयोग करता है तो चंडीगढ़ में महज 1.7 फीसदी परिवार के पास मच्छरदानी है। जम्मू कश्मीर में 2.3 फीसदी, हिमाचल प्रदेश में 3.5 फीसदी और राजस्थान के 4.1 फीसदी गृहस्थों के पास मच्छरदानी है।
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