कर्नाटक (Karnataka) के दक्षिण कोलार जिले में रोबटर्सनपेट तहसील के पास स्थित कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields) 3.2 किलोमीटर गहरी है। इस सोने की खदान से 121 सालों में 900 टन सोना निकाला जा चुका है। यह खदान साल 2011 में बंद हो गई है। केजीएफ (KGF) फिल्म इसी सोने की खदान पर बनी है।
3.2 किलोमीटर गहरी है यह खदान
कर्नाटक के दक्षिण कोलार जिले में रोबटर्सनपेट तहसील के पास एक ऐसी सोने की खदान है, जो दुनिया में काफी मशहूर रही है। कोलार गोल्ड फील्ड्स (Kolar Gold Fields) नाम की यह सोने की खदान दुनिया की सबसे गहरी सोने की खदानों में से एक है। यह खदान 3.2 किलोमीटर गहरी है। इस खदान से 121 सालों में 900 टन सोना निकाला गया है। इस खदान को साल 2011 में बंद कर दिया गया था। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, साल 1799 के श्रीरंगपट्टनम के युद्ध में मुगल शासक टीपू सुल्तान को अंग्रेजों ने मार गिराया था और उसकी कोलार की खदानों को अपने कब्जे में ले लिया था।
121 सालों में निकला 900 टन सोना
ब्रिटिश सैनिक माइकल फिट्जगेराल्ड लेवेली ने साल 1871 में वॉरेन का एक लेख पढ़ा था। इसके बाद उसके मन में सोने को पाने का जुनून जाग गया था। लेवेली ने वहां पर कई तरह की जांच की और सोने की खदान खोजने में सफल रहे। भारत सरकार ने साल 1970 में भारत गोल्ड माइन्स को केजीएफ सौंप दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, 121 सालों तक इस खान से 900 टन से ज्यादा सोना निकाला जा चुका है।
इसी सोने की खदान पर बनी है केजीएफ फिल्म
केजीएफ फिल्म कोलार गोल्ड फील्ड्स पर ही बनी है। इस फिल्म में इसी सोने की खदान की कहानी है। केजीएफ की फुल फॉर्म ही है कोलार गोल्ड फील्ड्स। साल 2018 में KGF Chapter 1 आई थी और अब KGF chapter 2 रिलीज हुई है। केजीएफ का पहला पार्ट काफी सफल रहा था।
लोग जमीन में हाथ डालकर निकाल लेते थे सोना
ब्रिटिश शासकों ने सोने की खदान वाला कोलार का क्षेत्र अपने पास रखा था और बाकी की जमीन मैसूर राज्य को दे दी थी। इतिहासकारों के अनुसार, चोल साम्राज्य के लोग उस समय कोलार की जमीन में हाथ डालकर सोना निकाल लेते थे। ब्रिटिश सरकार के लेफ्टिनेंट जॉन वॉरेन को इसकी जानकारी लगी, तो उन्होंने गांव वालों से सोना निकलवाया। गांव वाले जब इस मिट्टी को पानी से धोते, तो सोने के कण दिखाई देते थे।
अंग्रेज केजीएफ को कहते थे छोटा इंग्लैंड
भारी मात्रा में सोना निकलने के चलते अंग्रेजों को केजीएफ इतना पसंद आ गया था कि उन्होंने वहीं घर बनाने शुरू कर दिए थे। एक तरह से केजीएफ अंग्रेजों का छोटा इंग्लैंड बन गया था। अंग्रेज केजीएफ को छोटा इंग्लैंड कहते थे। साल 1930 तक केजीएफ में करीब 30 हजार मजदूर काम करने लग गए थे।
भारत का पहला ऐसा शहर जहां आई बिजली
लेवेली ने खदान का लाइसेंस लेकर खुदाई चालू कर दी थी, लेकिन बिजली की कमी महसूस होती थी। लेवेली ने केजीएफ में बिजली लाने का निश्चय किया और 130 किलोमीटर दूरी पर कावेरी बिजली केंद्र बनाया। यहीं से खदान में बिजली की आपूर्ति हुई। इस तरह कोलार गोल्ड फील्ड्स भारत का पहला ऐसा शहर है, जहां बिजली आई।
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