नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के रिसर्च में चीन अब अमरीका को पीछे छोड़ रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार 2020 में ऐसा पहली बार हुआ, जब एआई के बारे में चीन के अकादमिक अनुसंधानों का हवाला सबसे अधिक बार दिया गया। इसे चीन में हो रहे रिसर्च की बेहतर हो रही गुणवत्ता का संकेत माना गया है। इससे पहले तक एआई रिसर्च के मामले में अमरीका काफी आगे था।
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चीन की स्थिति मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया कि एआई के क्षेत्र में चीन की स्थिति मजबूत हो रही है। इसकी बड़ी वजह है कि वहां बड़ी मात्रा में संबंधित डाटा तैयार हो रहा है। एक अनुमान के अनुसार 2030 तक चीन में आठ अरब उपकरण ऐसे होंगे जो आधुनिक तकनीक से चलेंगे यानी वे इंटरनेट के माध्यम से काम कर सकेंगे। उन उपकरणों में कार, इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े उपकरण, रोबोट और दूसरे तरह के औजार भी शामिल होंगे।
प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ता है
एआई का उपयोग कई उद्योगों में आज हो रहा है। जानकारों के अनुसार इसका देश की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर असर पड़ता है। अमरीका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बारे में बनाए गए नेशनल सिक्युरिटी कमीशन ने बीते मार्च में ये चेतावनी दी थी कि एआई के क्षेत्र में अमरीका के पास अभी जो पहल है, उसे वह चीन के हाथों गंवा सकता है। इस आयोग के अध्यक्ष गूगल कंपनी के पूर्व सीईओ एरिक श्मिड्ट हैं।
रिसर्च का प्रतिशत 20.7 रहा
ये चर्चा आज पूरी दुनिया में चल रही है कि एआई के क्षेत्र में अमरीका और चीन के बीच होड़ है। अब ऐसा 2020 में पहली बार हो रहा है जब इस क्षेत्र में चीन में हुए अनुसंधानों का हवाला अमरीका में हुए रिसर्च से अधिक हो रहा है। अमेरिका की स्टेनफॉर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक अध्ययन के अनुसार अकादमिक दस्तावेजों में चीन में हुए रिसर्च का प्रतिशत 20.7 रहा। वहीं अमरीका रिसर्च के मामले में 19.8 ही रहा।
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